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Showing posts from December, 2015

रात की बात यूट्यूब के साथ

                            दुनिया के एक कोने में बैठे दूसरे कोने का चेहरा देखना, रात के ख़ामोश मंज़र में आपकी सोच के हिसाब से चलने वाला कोई है तो वो यूट्यूब है, यूट्यूब आज के समय का सबसे शक्ति शाली चल-चित्र देखने का माध्यम बन चुका है। जिसके द्वारा आप दुनिया में किसी भी तरह की जानकारी को आदान प्रदान समय रहते कर सकते है।  खाली वक़्त का एहसास आपके दिल में घर सा करा देता है बाक़ी यू ट्यूब।  यूट्यूब की वजह से मेरी कई रातें दिन में तब्दील हुयी है । शायद मैं यह कहूँ की यूट्यूब ने ही मुझे जो जानकारी दी है व शायद मुझे बाक़ी किताबें काम समय में ना दे पाती। कई रातों को इसने दुःख में बदला और कई रातों कि इसने सुख में, प्यार के मायने भी इसी ने समझाए, तकरार में अपने आप को मनाने के तरीक़े भी इसने सिखाए। यूट्यूब सिर्फ़ एक नाम नहीं है यह है ज़रिया है आज के समय में अपने हिसाब से अपने हिसाब की ज़िन्दगी जीने का। मैं अपने बिताए गए कई दिनों के मुक़ाबले मेरी शाम और रात ज़्यादातर मददगार साबित हुयी है। हर मौसम के ...

पक्षपाती क़ानूनी सी नज़र

कल दिनभर टीवी पर चर्चा होती रही की निर्भया बलात्कार कांड का आरोपी जिसे हाई कोर्ट ने रिहा करने का फ़ैसला सुनाया वो सरासर ग़लत है और उस आरोपी को रिहाई नहीं मिलनी चाहिए। पूरे दिन मुख्यधारा की मीडिया ने ऐसा समाचार दिखाना शुरू किया जैसे देश का सबसे बड़ा देशद्रोही आज ही रिहा हो रहा है। सबसे बड़ा अपराधी नहीं होना चाहिए रिहा अगर हुआ तो इससे देश में बहुत बड़ा नुक़सान हो जाएगा और वगेरा -२ । मगर असल बात तो कुछ और है जनाब। यह सब न्याय की बात नहीं यह तो सब जातिवाद की वजह से हो पाया है। इसे इस तरह से समझ कर देखते है, आपके घर में ५ लोग है। बहुत सालों से ख़ुशी ख़ुशी रह रहे है और आपके पड़ोस में भी एक परिवार से ५ ही लोग है वो भी ख़ुशी से रहते है। इत्तिफ़ाक़ से दोनो एक ही जाति के निकलते है। उनके सामने वाली गली में एक दूसरी जाति का परिवार रहता है। वो परिवार इन दोनो परिवारों से शैक्षिक तौर पर व सामाजिक तौर पर बहुत ऊपर है मगर उच्च जाति व नीच जाति के अंतर के चलते वो दोनो परिवार उस सामने वाले परिवार को हींन भावना से देखता है। इसीलिए नहीं की वो ज्ञानी है मगर हाँ वो नीच जाति का परिवार है। एक दिन...

लालच के भेट चढा चेन्नई का शहर

पुरे दुनिया में जिस तरह से मौसम बदल रहा उससे एक ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि आने वाले कुछ सालों में इंसानी जीवन का खात्मा निश्चित है।  (Photo- Indianexpress.com) चेन्नई में पिछले 17 दिनों से बे मौसम बरसात की वजह से वहां का जीवन अस्तव्यस्त हो चूका है। इसका सबसे बड़ा कारण वहां के प्राकर्तिक संसाधनों पर सरकार व गैर सरकार द्वारा कब्जा कर लेना। NDTV प्राइम टाइम में खुलासा हुआ था की वहां पर जितने भी तालाब, सुखी नदी, नहर थी व सब सरकार ने ईमारत बना कर ख़तम कर दी और बाकि सोसाइटी बना कर। चेन् नई में पानी के रुकने का सबसे बड़ा कारण पानी ने निकलने की जगह न होना।  आख़िर क्या कारण रहा होगा इस आपदा से होने वाले नुक़सान का। चेन्नई में आज लोग अपनी घरों की छतों पर ही अपने जीवन को व्यतीत करने के लिए बेबस है। यह लोग अपना ज़्यादातर समय अससमान को देख कर कोसने में लगा रहे होंगे। चेन्नई की सरकार व निजी संस्थाओ द्वारा किया गया अतिक्रमण आज इन लोगों के जीवन को अधर में छोड़ गयी है।  chennai-floods-are-not-a-natural-disaster-theyve-been-created-by-greedy-town-planners-and-dumb-enginee...