विकासशील देश के एक छोटे से शहर में जहाँ ज्यादातर लोग जिनकी उम्र 25 से 35 के बिच में आती है उनकी ज़िन्दगी का सफ़र कुछ अलग ही मायने रखता है | अक्सर यह देखा गया है कि एक व्यक्ति जो की किसी अच्छे शहर में रह रहा हो वो अपनी ज़िन्दगी का लगभग आदा समय अपने घर के कमरे में ही बिता देता है | बरहाल यह बात तब साबित हो जाएगी जब आप अपने को इस बात को लेकर गहराई से अध्यन करेंगे | आज मैं यहाँ आप सबके समक्ष एक कमरे की बात रख कर क्या कहना चाहता हूँ आप शायद यही विचार कर रहें होंगे कि आखिर ऐसा क्या हुआ, जो आज मैं एक कमरे के ऊपर कुछ लिखने के लिए मजबूर हो गया | आज का दौर जिसे हम "इनफार्मेशन एज " कहते है वहां आज एक व्यक्ति अपना पूरा समय कैसे व्यतीत करता है या कर लेता है | एक सवाल जो मेरे जेहन में कई बार आ चूका हैं वो यह है कि, सुबह से लेकर रात तक एक ही कमरे में कैसे कोई अपना पूरा दिन बिता सकता हैं ? यह भी देखा गया है कि जब हम अपने दिन की सुरुआत करते है तो अपने दिमाग में एक काम काजो का ढाचा तयार कर लेते हैं और उसी के अनुसार अपना दिन बिताना शुरु कर देते है | मगर अब जिस तरह से समय बद...
नज़रिया आपके बीच रहने वाले एक व्यक्ति का