अहमियत यह एक एहसास है किसी का किसी के प्रति, समझ समझ की बात है| एक तरफ यकीन करना मुश्किल तो एक तरफ बहुत ही आसान| आज के इस भगवा ज़िन्दगी में पहचान पाना मुश्किल है कि कौन सच्चा है आपके प्रति और कौन झूठा| कहने को तो बहुत कुछ है मेरे पास लेकिन, इंसान कि बातें कुछ जगह मायने नहीं रखती. बहुत जगह ऐसी भी है जहा अक्सर लोग इंसान को ज्यादा अहमियत नहीं देते है जानवरों से ज्यादा लगाव रखते है शायद उनके मायने इस जगह कुछ अलग हो| आप, और मैं तहजीब और पहचान के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले शब्द है, मगर इनका मतलब जगह- जगह पर बदल जाता है| कई बार यह भी देखा गया है कि लोग सिर्फ इस बात पर तवज्जो देते है कि आप सही तौर तरीके से बात कर रहे है या नहीं| उन लोगो के लिए काम इनता महत्व नहीं रखता जितना आपका बोलने का लहजा| हम लोग एक जैसे समुदाय में जाकर उनके जैसे भले ही दिखावटी रूप से दिखने लगे या उनमे सम्मिलित हो जाये मगर, प्रकर्ति के नियम के अनुसार बेढंग और सिर्फ खुश करने के लिए उसके रहन सहन अपना लेना ठीक है| मगर यह बातें लम्बे समय के अनुकूल नहीं अता| एक समय ऐसा आ ही जाता है जिसमे आप उनसे खुदबखुद अलग महसूस करन...
नज़रिया आपके बीच रहने वाले एक व्यक्ति का