अहमियत यह एक एहसास है किसी का किसी के प्रति, समझ समझ की बात है| एक तरफ यकीन करना मुश्किल तो एक तरफ बहुत ही आसान| आज के इस भगवा ज़िन्दगी में पहचान पाना मुश्किल है कि कौन सच्चा है आपके प्रति और कौन झूठा| कहने को तो बहुत कुछ है मेरे पास लेकिन, इंसान कि बातें कुछ जगह मायने नहीं रखती. बहुत जगह ऐसी भी है जहा अक्सर लोग इंसान को ज्यादा अहमियत नहीं देते है जानवरों से ज्यादा लगाव रखते है शायद उनके मायने इस जगह कुछ अलग हो|
आप, और मैं तहजीब और पहचान के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले शब्द है, मगर इनका मतलब जगह- जगह पर बदल जाता है| कई बार यह भी देखा गया है कि लोग सिर्फ इस बात पर तवज्जो देते है कि आप सही तौर तरीके से बात कर रहे है या नहीं| उन लोगो के लिए काम इनता महत्व नहीं रखता जितना आपका बोलने का लहजा| हम लोग एक जैसे समुदाय में जाकर उनके जैसे भले ही दिखावटी रूप से दिखने लगे या उनमे सम्मिलित हो जाये मगर, प्रकर्ति के नियम के अनुसार बेढंग और सिर्फ खुश करने के लिए उसके रहन सहन अपना लेना ठीक है| मगर यह बातें लम्बे समय के अनुकूल नहीं अता| एक समय ऐसा आ ही जाता है जिसमे आप उनसे खुदबखुद अलग महसूस करने लगते है |
जरुरी नहीं है कि आप उनके जैसे ही बर्ताव नहीं कर रहे इसीलिए उनसे अलग प्रतीत हो रहे है बल्कि होता यूँ है कि कुछ लोग उनके साथ रह कर भी अपने आप कि ख़ुशी महसूस नहीं कर पाते| कभी- कभी आप अपने जानकारों के घर जाते है और वहा बहुत से गहरे विचारो के साथ आपका सुआगत किया जाता है इस मौके पर अगर आपका मन या आप स्वतंत्र हर तरीके से तो, आप खुदबखुद अपने आप को एक खुश मिजाज़ व्यक्ति समझेंगे मगर, उसी के विपरीत अगर आप खुद को अस्वस्थ महसूस कर रहे है, तो आप को दी जाने वाले हर तरह कि ख़ुशी एक मात्र एक वस्तु के उपभोग जैसा लगेगा जिसके समाप्त होने पर आप अपने पुराने एहसास पर पहुच जायेंगे|
कभी कबार हम रिश्तो को देखकर उनकी अहमियत को समझते है फिर उनके हर काम को तवज्जो देते | कभी- कभी हम देख कर भी अनदेखा कर देते है| रिश्तो का क्या है भला यह एक मात्र रिश्ता ही तो है रिश्ता कहाँ जायेगा कोई गैर तो नहीं है की जो अलग हो जायेगा. हम रिश्तो के एहमियत के हिसाब से उसे देखते है हमारा नजरिया हर तरह से अलग होता है जब हम लोग रिश्तो कि बात करते है हम लोग भूलचूक से कई बार रिश्तो में कडवाहट बना देते है या आ जाती है मगर उस षड जो रिश्तो के बिच जो फासला आ जाते है उसे आप चाहे तो भी भर नहीं सकते. थोडा मुश्किल हो जाता है|
रिश्ते भी कई तरह के होते है माँ बाप, भाई बहिन, पति पत्नी, पोता पोती और बहुत से ऐसे रिश्ते जिसे हम आज के दौर में उसके साथ या उसे लेकर चल रहे है| हम लोग बहुत से ऐसे रिश्तो को भी देखते है जो इन रिश्तो से भी बहुत मजबूत है और हर रिश्ते को ताकत प्रदान करते है| इंसानियत के रिश्तों को कोई योग्यता और किसी समय कि जरुरत नहीं होती यह तो सिर्फ अपने बुद्धि के स्तर पर रखा जाता है कि आप और हम वाकई में यही( इंसान) है या कोई और, जो इंसान को भी नहीं महत्व दे रहा है आज के इस दौर में?
Rahul Vimal
St. of Master in Mass Communication
Gautam Buddha University
India
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