दिल्ली व दूसरे शहरों में हाल ही में एक ऐसा समाज उभरा है, जिसे हम भटकल समाज भी कह सकते हैं | भटकल समाज से यहाँ मतलब उन बातों से है जिन्हें हम अपने समाज में आये दिन देखते हैं जैसे बहुत से लोग आपको आजकल ऐसे भी मिलते या मिलेंगे जिनकी ख़ासियत, बिना तथ्यों के आपसे बात करना, और किसी की कही सुनी बातों में आकर दूसरों को गलत तरीके से समझाना और पूरी तरीके से विश्वास दिलाने की कोशिश करना | यहाँ भटकल समाज का मतलब उन युवाओं से है जो डाक्यूमेंट्स के आधार पर अच्छे पढ़े-लिखे तो नजर आते हैं मगर जब उनसे सामान्य ज्ञान के बारे में बात करें तो यह मुश्किल से उन सवालों का जवाब दे पाते हैं | हमारे समाज में एक ऐसी पीड़ी बनकर उभर रही है जिसे आजकल के बड़े एवं विशाल मॉल पसंद हैं न कि घर, उन्हें मॉलस में आराम नजर आता है , उसमे घूमना, शॉपिंग करना, मूवी देखना, मैक-डोनाल्ड में बर्गर खाना, बहुत पसंद है बजाये किसी के साथ सामाजिक बात करना और किसी परेशानी के खिलाफ एक साथ होकर आवाज उठाना | भटकल समाज के सभी पहलुओं को समझने व समझाने के लिए हमें सबसे पहले अपने देश की शिक्षा प्रणाली को समझना होगा बाद में दूसरे पहल...
नज़रिया आपके बीच रहने वाले एक व्यक्ति का