हाँ मेरे दोस्त मुझे अपने ही लोग बाहर भी अकेला कर गए । तुम यक़ीन मानों मैंने वो सब किया जो एक आम व्यक्ति अपनी हद में रह कर कर सकता है। जैसे सबसे मिलकर प्यार से बातें की बात करने से पहले पूरी तैयारी की सुनो, कपड़े भी ढंग के पहने! और तहज़ीब से भी बातें की मगर मेरे दोस्त में ना चाह कर भी इस दौर में पीछे रह गया लोगों की बातों में हामी भर कर भी अकेला रह गया क्या ग़लती है मेरी बस यही की अकल चलती है मेरी? लोगों से सवाल करो तो वो बातों को पलट देते है सवाल ना करो को मंदबुधी समझते है अब तुम ही बताओ मेरे दोस्त अब कहाँ अधूरा रह गया? हमने फिर एक बार इस दौर में लोगों के साथ चलने की कोशिश की उनके इशारे पर आगे बढ़ने की शुरुआत की मगर फिर क्या वोहि अपने इशारे को लेकर बीच में ही पलट फेर कर गए और फिर दुबारा ऐ मेरे दोस्त मुझे यह अकेला कर गए।। राहुल कु. विमल
नज़रिया आपके बीच रहने वाले एक व्यक्ति का