अकेलेपन की ज़रूरत


अपने होने का एहसास आपको कब महसूस होता है?
 
एक सवाल जिसका कोई निश्चित समय नहीं,
कोई स्वरूप नहीं, पता ठिकाना नहीं।

भला, क्या ज़रूरत है किसी को इस सवाल के जवाब की?

ज़रूरत- इस रफ़्तार भरी ज़िन्दगी के साथ क़दम से क़दम मिलाकर चलने की।
ज़रूरत- अपने आप को सही तौर पर पहचान करने की।
ज़रूरत- दिए गए काम को सही तरह से करने की।
ज़रूरत- सही और ग़लत में भेद करने की।
इसीलिए इस सवाल के जवाब की ज़रूरत है।

क्योंकि, सब अपनी गति से ही तो चल रहा है।
यह मेट्रो, यह बस, दुकान का शटर, दफ़्तर के लिफ़्ट का दरवाज़ा, और घड़ी की सुई।
फिर भी ना जाने क्यूँ यह रफ़्तार मेरे अपने होने के एहसास को कही खो रहा है।

क्या अकेलापन सच में ज़रूरत है मेरी और आपकी?


राहुल विमल

 

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